ชุดตัวอย่างเรียงความแก้กระทู้ธรรม (ข้อสอบสนามหลวงปีเก่า) กลับหน้าฝึกแต่งกระทู้
ชั้น: นักธรรมชั้นโท ๒ธรรมศึกษาชั้นตรี ประถม ๕ธรรมศึกษาชั้นตรี มัธยม ๕ธรรมศึกษาชั้นตรี อุดม ๑ธรรมศึกษาชั้นโท ประถม ๔ธรรมศึกษาชั้นโท มัธยม ๓ธรรมศึกษาชั้นเอก ประถม ๑ธรรมศึกษาชั้นเอก มัธยม ๑ธรรมศึกษาชั้นเอก อุดม ๑
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ตัวอย่างเรียงความแก้กระทู้ธรรม

ธรรมศึกษาชั้นตรี อุดม

จากข้อสอบสนามหลวงปีเก่า ๑ ข้อ · ภาษาฮินดี
ข้อพ.ศ.กระทู้ตั้งบทเชื่อม
๑๒๕๖๕ ททมาโน ปิโย โหติ๑

วิธีใช้: อ่านกระทู้ตั้งแล้วลองวางโครงเรื่องด้วยตนเองก่อน จึงเปิดดูตัวอย่าง สังเกตลำดับ: บทตั้ง → อารัมภบท → อธิบายบทตั้ง → ขยายความ → ประโยคสะพานและบทเชื่อม (บอกคัมภีร์ที่มา) → อธิบายบทเชื่อม → ตัวอย่างในชีวิต → สรุปพร้อมยกบทตั้ง → ปิดท้าย

ประโยคสะพานบทเชื่อมและคำอธิบายตัวอย่างในชีวิตสรุปและปิดท้าย

ตัวอย่างเรียบเรียงโดยระบบจากคำอธิบายพุทธศาสนสุภาษิต บทเชื่อมเลือกจากสุภาษิตที่โจทย์กำหนดให้ (ธรรมศึกษา) หรือจากสุภาษิตในหนังสือของชั้นนั้นที่เนื้อความเข้ากัน (นักธรรม) ผู้สอบควรเรียบเรียงด้วยสำนวนของตนเอง และจำบาลีกับคัมภีร์ที่มาให้ถูกต้อง

พิมพ์จากระบบสนับสนุนการออกข้อสอบ · 01/10/2569

ข้อ ๑ · ข้อสอบสนามหลวง พ.ศ. ๒๕๖๕ ธรรมศึกษาชั้นตรี อุดม · บทเชื่อม ๑ บท (เลือกจากที่โจทย์กำหนด) · ประมาณ ๖๑๕ คำ
โจทย์: ททมาโน ปิโย โหติ. ผู้ให้ย่อมเป็นที่รัก. คัมภีร์ที่มา : อังคุตตรนิกาย ปัญจกนิบาต แต่งอธิบายให้สมเหตุสมผล โดยใช้สุภาษิตที่สนามหลวงแผนกธรรมกำหนดมาให้ จำนวน ๓ สุภาษิตข้างล่างนี้ มาประกอบอ้างอิงเพียง ๑ สุภาษิต และสุภาษิตที่อ้างมานั้น ควรอธิบายเชื่อมความให้ สมกับเรื่องในกระทู้ตั้ง ในชั้นนี้ กำหนดให้เขียนลงในกระดาษใบตอบตั้งแต่ ๒ หน้า (เว้นบรรทัด) ขึ้นไป ททํ มิตฺตานิ คนฺถติ. ผู้ให้ ย่อมผูกไมตรีไว้ได้ คัมภีร์ที่มา : สังยุตตนิกาย สคาถวรรค ทเทยฺย ปุริโส ทานํ. คนควรให้ของที่ควรให้ คัมภีร์ที่มา : ขุททกนิกาย ชาดก สัตตกนิบาต อสาธุ สาธุนา ชิเน. พึงชนะคนไม่ดีด้วยความดี คัมภีร์ที่มา : ขุททกนิกาย ธรรมบท ขุททกนิกาย ชาดก ทุกนิบาต
Dadamāno piyo hoti
दाता प्रिय होता है।
(अङ्गुत्तरनिकाय, पञ्चकनिपात 22/44)

อารัมภบทअब आरम्भ में उद्धृत धम्म-विषय के अर्थ की विस्तार से व्याख्या की जाएगी, ताकि वह अध्ययन और आचरण के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो।

อธิบายบทตั้งव्याख्या इस प्रकार है: इस सूक्ति में "देने वाला" शब्द का अर्थ है वह व्यक्ति जिसका स्वभाव त्यागमय है और जो दूसरों के हित के लिए अपनी वस्तुएँ बाँटने को तत्पर रहता है; और "प्रिय होता है" का अर्थ है कि उसे आसपास के लोगों से स्नेह, वात्सल्य और शुभकामना प्राप्त होती है। यह बुद्ध-वचन प्रकृति के एक नियम की ओर संकेत करता है: दूसरों का प्रेम माँगकर या बलपूर्वक प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि वह देने वाले के प्रति अपने-आप उत्पन्न होता है।

ขยายความบทตั้งदेने वाला इसलिए प्रिय होता है क्योंकि हर मनुष्य सुख चाहता है और दुःख नहीं चाहता। जो कोई उसे सुखी बनाता है और कठिनाई से निकलने में सहायता करता है, वह उससे प्रेम करता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति केवल लेता है, कभी देता नहीं और सदा दूसरों का लाभ उठाता है, उसके पास चाहे कितना भी धन या अधिकार हो, उसके आसपास लोग केवल स्वार्थ की आशा से हो सकते हैं; और जब स्वार्थ समाप्त हो जाता है, तो वे लोग चले जाते हैं। अतः सच्चे मन से देने से उत्पन्न प्रेम, अधिकार या स्वार्थ से खरीदे गए प्रेम से अधिक स्थिर होता है।

ประโยคสะพาน + ที่มา ๑दान उस धागे के समान है जो लोगों के हृदयों को एक साथ बाँधे रखता है। जो देना और बाँटना जानता है, वह दूसरों के साथ मित्रता को बाँध लेता है, जिससे अच्छे सम्बन्ध बनते हैं और सहायता करने वाले मित्र मिलते हैं। यह संयुत्तनिकाय-सगाथावग्ग में आए बुद्धवचन के अनुरूप है:

อธิบายบทเชื่อม ๑व्याख्या इस प्रकार है: "मैत्री" शब्द का अर्थ है मित्रता, एक-दूसरे के प्रति स्नेह और शुभकामना। यह सूक्ति सिखाती है कि देने वाला मैत्री को बाँधे रखता है, अर्थात् देना उस रस्सी के समान है जो लोगों के हृदयों को एक साथ बाँधती है और अच्छे संबंध उत्पन्न करती है। देने वाले के मित्र होते हैं, और वे मित्र आवश्यकता के समय उसकी सहायता के लिए तत्पर रहते हैं।

อธิบายบทเชื่อม ๑मैत्री को बाँधने वाला देना केवल धन और वस्तुएँ देना नहीं है। अच्छे वचन देना, समय देना, शारीरिक श्रम से सहायता देना, क्षमा देना और प्रोत्साहन देना, ये सभी ऐसे दान हैं जो लोगों के हृदयों को बाँधते हैं। ४ संगहवत्थु नामक धम्म-सिद्धांत में भी देने को पहले स्थान पर रखा गया है, जिससे पता चलता है कि देना मित्रता बनाने का हृदय है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति कंजूस है, कभी बाँटता नहीं और केवल दूसरों से लेने की सोचता है, उसे सच्चा मित्र मिलना कठिन होता है, क्योंकि उसके पास लोगों के हृदयों को बाँधने वाला कुछ नहीं होता।

ตัวอย่างในชีวิตउदाहरण के लिए, जो माता-पिता जीवन भर अपनी संतान को प्रेम, देखभाल और शिक्षा देते हैं, वे संतान को किसी भी अन्य से अधिक प्रिय होते हैं। जो बड़ा भाई या बहन अपने खिलौने या मिठाई छोटे भाई-बहन के साथ बाँटता है और संकट के समय उनकी रक्षा करता है, वह उनका प्रिय होता है। जो कर्मचारी मुस्कुराते हुए उदारता से सेवा करता है, वह ग्राहकों का प्रिय होता है। केवल एक मुस्कान और कोमल वचन देना भी, बिना थोड़ा-सा धन खर्च किए, हमें दूसरों का प्रिय बना सकता है।

สรุปनिष्कर्ष यह है: जो प्रिय बनना चाहता है, उसे सदा स्वयं से पूछना चाहिए कि "आज मैंने दूसरों को क्या दिया?" और फिर अवसर तथा सामर्थ्य के अनुसार लगन से देना चाहिए। ऐसा देना पुण्य भी है और मनुष्य का सच्चा आकर्षण भी। यह आरम्भ में विषय के रूप में उद्धृत धम्म-वचन के अनुरूप है:

Dadamāno piyo hoti
दाता प्रिय होता है।

ปิดท้ายइस प्रकार ऊपर वर्णित रूप में इसका आशय स्पष्ट किया गया।