พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
ธรรมศึกษาชั้นโท (ต่างประเทศ) · หลักสูตรฉบับปรับปรุง ๒๕๕๗ · ๓๒ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๓๒ บท
ปัญญาวรรค — หมวดปัญญา ๘ บท
यह अल्पश्रुत मनुष्य बैल की तरह बूढ़ा होता है; उसका मांस बढ़ता है, पर प्रज्ञा नहीं बढ़ती।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๕.
धन नष्ट हो जाने पर भी प्रज्ञावान जीवित रह सकता है; पर प्रज्ञाहीन धनी होकर भी जी नहीं सकता।
ขุ. เถร. ๒๖/๓๕๐.
जो प्रज्ञावान, ज्ञानसम्पन्न, काम की व्यवस्था में कुशल, काल और अवसर को जानने वाला है, वही राजसेवा में रह सकता है।
ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๓๓๙.
चतुर लोग कहते हैं कि प्रज्ञा सर्वश्रेष्ठ है, जैसे चन्द्रमा तारों में श्रेष्ठ है; शील, श्री और सत्पुरुषों का धर्म भी प्रज्ञावान के पीछे चलते हैं।
ขุ. ชา. จตฺตาฬีส. ๒๗/๕๔๑.
यदि थोड़े सुख को त्यागने से विपुल सुख दिखाई दे, तो प्रज्ञावान विपुल सुख को देखकर थोड़े सुख को छोड़ दे।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๓.
मन्दबुद्धि मनुष्य यश पाकर अपने अहित का आचरण करता है और अपने तथा दूसरों को पीड़ा देने की राह चलता है।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๔๐.
मूर्ख को ज्ञान होता है तो केवल उसके विनाश के लिए; वह उसके मस्तिष्क को भ्रमित कर देता है और मूर्ख के शुभ अंश को नष्ट कर देता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๔.
मन्दबुद्धि और अस्थिर चित्त वाला सौ वर्ष जिए, उससे प्रज्ञावान ध्यानी का एक दिन जीना श्रेष्ठ है।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๙.
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