พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
ธรรมศึกษาชั้นโท (ต่างประเทศ) · หลักสูตรฉบับปรับปรุง ๒๕๕๗ · ๓๒ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๓๒ บท
เสวนาวรรค — หมวดคบหา ๗ บท
पण्डित असत्पुरुषों का संग न करे, सत्पुरुषों का संग करे; क्योंकि असत्पुरुष नरक में ले जाते हैं और सत्पुरुष सुगति तक पहुँचाते हैं।
ขุ. ชา. วีสติ. ๒๗/๔๓๗.
जैसे कोई सुगन्धित तगर को पत्ते में लपेटे तो पत्ता भी सुगन्धित हो जाता है, वैसे ही ज्ञानियों का संग है।
ขุ. ชา. วีสติ. ๒๗/๔๓๗.
दुर्जनों का संग करने वाला एकान्त सुख नहीं पाता; वह स्वयं को विपत्ति में डालता है, जैसे गिरगिट गोहों के झुंड में जा घुसा।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๔๖.
जो स्थिर सुख चाहता है, वह पापमित्रों को त्याग दे, केवल उत्तम पुरुषों का संग करे और उनके उपदेश में स्थित रहे।
ขุ. เถร. ๒๖/๓๐๙.
जैसे कोई सड़ी मछली को कुश घास में लपेटे तो घास भी दुर्गन्धित हो जाती है, वैसे ही मूर्खों का संग है।
ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๓๐๓.
जैसे व्यक्ति को मित्र बनाता है और जैसे का संग करता है, वैसा ही वह हो जाता है; क्योंकि साथ रहना उसे वैसा बना देता है।
ขุ. ชา. วีสติ. ๒๗/๔๓๗.
पण्डित श्रद्धावान, शीलप्रिय, प्रज्ञावान और बहुश्रुत लोगों से मित्रता करे; क्योंकि सज्जनों का संग उन्नति है।
ขุ. เถร. ๒๖/๔๐๕.
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
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