พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
ธรรมศึกษาชั้นโท (ต่างประเทศ) · หลักสูตรฉบับปรับปรุง ๒๕๕๗ · ๓๒ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๓๒ บท
อัตตวรรค — หมวดตน ๓ บท
दूसरों के हित के लिए, चाहे वह कितना ही बड़ा हो, अपने हित की उपेक्षा न करे। अपने हित को जानकर उसमें तत्पर रहे।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๗.
जैसा दूसरों को सिखाए, वैसा स्वयं करे। जो स्वयं को भली-भाँति वश में कर चुका है, वही दूसरों को वश में करे; कहते हैं, अपने आप को वश में करना कठिन है।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๖.
पण्डित पहले स्वयं को उचित गुण में स्थापित करे, फिर दूसरों को सिखाए; तब वह मलिन नहीं होता।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๖.
กัมมวรรค — หมวดกรรม ๙ บท
‘बहुत ठंड है, बहुत गर्मी है, बहुत देर हो गई’ कहकर काम छोड़ देने वाले के पास से सारे लाभ निकल जाते हैं।
ที. ปาฏิ. ๑๑/๑๙๙.
मन्दबुद्धि मूर्ख पाप करते हुए उसे समझता नहीं; वह अपने ही कर्मों से आग में जलने के समान संतप्त होता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๓.
जैसा बीज बोता है, वैसा ही फल पाता है; अच्छा करने वाला अच्छा पाता है, बुरा करने वाला बुरा।
สํ. ส. ๑๕/๓๓๓.
जो पहले दूसरों द्वारा किए गए उपकार और हित को नहीं पहचानता, उसके वांछित प्रयोजन नष्ट हो जाते हैं।
ขุ. ชา. สตฺตก. ๒๗/๒๒๘.
जो पहले दूसरों द्वारा किए गए उपकार और हित को पहचानता है, उसके वांछित प्रयोजन बढ़ते हैं।
ขุ. ชา. สตฺตก. ๒๗/๒๒๘.
जो पहले किए जाने योग्य काम को बाद में करना चाहता है, वह बाद में पछताता है, जैसे वरुण वृक्ष की डाली तोड़ने वाला युवक।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๒๓.
यदि पहले किए पुण्य-पाप के कारण सुख-दुःख मिले, तो उससे पुराना पाप उतर जाता है, जैसे ऋण चुक जाता है।
ขุ. ชา. ปญฺญาส. ๒๘/๒๕.
सभी प्राणी सुख चाहते हैं। जो अपने सुख की खोज में उन्हें दण्ड से पीड़ित करता है, वह मरने के बाद सुख नहीं पाता।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๒.
सभी प्राणी सुख चाहते हैं। जो अपने सुख की खोज में उन्हें दण्ड से पीड़ित नहीं करता, वह मरने के बाद सुख पाता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๒.
ขันติวรรค — หมวดอดทน ๕ บท
क्षमावान अपना और दूसरों का हित करता है; क्षमावान स्वर्ग और निर्वाण के मार्ग पर आरूढ़ होता है।
ส. ม. ๒๒๒.
क्षमा समस्त पापों की जड़ काट देती है; क्षमावान निन्दा और कलह आदि की जड़ खोद डालता है।
ส. ม. ๒๒๒.
क्षमावान मैत्रीयुक्त, लाभी, यशस्वी और सदा सुखी माना जाता है; क्षमावान देवताओं और मनुष्यों को प्रिय और मनोहर होता है।
ส. ม. ๒๒๒.
क्षमावान शास्ता के उपदेश का पालन करता है; क्षमावान परम पूजा से जिन की पूजा करता है।
ส. ม. ๒๒๒.
क्षमा शील और समाधि रूपी गुणों का प्रधान कारण है; सभी कुशल धर्म क्षमा से ही बढ़ते हैं।
ส. ม. ๒๒๒.
ปัญญาวรรค — หมวดปัญญา ๘ บท
यह अल्पश्रुत मनुष्य बैल की तरह बूढ़ा होता है; उसका मांस बढ़ता है, पर प्रज्ञा नहीं बढ़ती।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๕.
धन नष्ट हो जाने पर भी प्रज्ञावान जीवित रह सकता है; पर प्रज्ञाहीन धनी होकर भी जी नहीं सकता।
ขุ. เถร. ๒๖/๓๕๐.
जो प्रज्ञावान, ज्ञानसम्पन्न, काम की व्यवस्था में कुशल, काल और अवसर को जानने वाला है, वही राजसेवा में रह सकता है।
ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๓๓๙.
चतुर लोग कहते हैं कि प्रज्ञा सर्वश्रेष्ठ है, जैसे चन्द्रमा तारों में श्रेष्ठ है; शील, श्री और सत्पुरुषों का धर्म भी प्रज्ञावान के पीछे चलते हैं।
ขุ. ชา. จตฺตาฬีส. ๒๗/๕๔๑.
यदि थोड़े सुख को त्यागने से विपुल सुख दिखाई दे, तो प्रज्ञावान विपुल सुख को देखकर थोड़े सुख को छोड़ दे।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๓.
मन्दबुद्धि मनुष्य यश पाकर अपने अहित का आचरण करता है और अपने तथा दूसरों को पीड़ा देने की राह चलता है।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๔๐.
मूर्ख को ज्ञान होता है तो केवल उसके विनाश के लिए; वह उसके मस्तिष्क को भ्रमित कर देता है और मूर्ख के शुभ अंश को नष्ट कर देता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๔.
मन्दबुद्धि और अस्थिर चित्त वाला सौ वर्ष जिए, उससे प्रज्ञावान ध्यानी का एक दिन जीना श्रेष्ठ है।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๙.
เสวนาวรรค — หมวดคบหา ๗ บท
पण्डित असत्पुरुषों का संग न करे, सत्पुरुषों का संग करे; क्योंकि असत्पुरुष नरक में ले जाते हैं और सत्पुरुष सुगति तक पहुँचाते हैं।
ขุ. ชา. วีสติ. ๒๗/๔๓๗.
जैसे कोई सुगन्धित तगर को पत्ते में लपेटे तो पत्ता भी सुगन्धित हो जाता है, वैसे ही ज्ञानियों का संग है।
ขุ. ชา. วีสติ. ๒๗/๔๓๗.
दुर्जनों का संग करने वाला एकान्त सुख नहीं पाता; वह स्वयं को विपत्ति में डालता है, जैसे गिरगिट गोहों के झुंड में जा घुसा।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๔๖.
जो स्थिर सुख चाहता है, वह पापमित्रों को त्याग दे, केवल उत्तम पुरुषों का संग करे और उनके उपदेश में स्थित रहे।
ขุ. เถร. ๒๖/๓๐๙.
जैसे कोई सड़ी मछली को कुश घास में लपेटे तो घास भी दुर्गन्धित हो जाती है, वैसे ही मूर्खों का संग है।
ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๓๐๓.
जैसे व्यक्ति को मित्र बनाता है और जैसे का संग करता है, वैसा ही वह हो जाता है; क्योंकि साथ रहना उसे वैसा बना देता है।
ขุ. ชา. วีสติ. ๒๗/๔๓๗.
पण्डित श्रद्धावान, शीलप्रिय, प्रज्ञावान और बहुश्रुत लोगों से मित्रता करे; क्योंकि सज्जनों का संग उन्नति है।
ขุ. เถร. ๒๖/๔๐๕.
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