พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นตรี · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๑ · ๕๐๐ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๕๘ บท
โกธวรรค — หมวดโกรธ ๒๙ บท
क्रोध बिलकुल अच्छा नहीं।
ขุ. ชา. ฉกฺก. ๒๗/๑๘๘.
क्रोध संसार में शस्त्र की जंग के समान है।
สํ. ส. ๑๕/๖๐.
क्रोध विनाश उत्पन्न करता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙.
क्रोध चित्त को क्षुब्ध करता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙.
जब क्रोध मनुष्य पर छा जाता है, तब अन्धकार छा जाता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙. ขุ. มหา. ๒๙/๑๘.
क्रोध पहले थोड़ा फिर बहुत होता है; वह असहनशीलता से जन्म लेकर बढ़ता है।
ขุ. ชา. ทสก. ๒๗/๒๗๓.
क्रोध मन्दबुद्धियों का विषय है।
ขุ. ชา. ทสก. ๒๗/๒๘๐.
द्वेष का समुत्थान क्रोध है।
ขุ. ชา. ทสก. ๒๗/๒๗๓.
द्वेष के समान पकड़ने वाला कोई नहीं।
ขุ. ธ. ๒๕/๔๘.
द्वेष के समान दोष कोई नहीं।
ขุ. ธ. ๒๕/๔๒.
क्रोध को मारकर मनुष्य सुख से रहता है।
สํ. ส. ๑๕/๕๗, ๖๔.
क्रोध को मारकर मनुष्य शोक नहीं करता।
สํ. ส. ๑๕/๕๗, ๖๔.
क्रोध से अभिभूत व्यक्ति कुशल को छोड़ देता है।
นัย- ขุ. ชา. ทสก. ๒๗/๒๘๖.
क्रोधी मनुष्य का वर्ण मलिन हो जाता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๘.
क्रोधी मनुष्य दुःख से रहता है।
นัย. องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๘.
क्रोधी मनुष्य हित को ग्रहण करके भी अहित का आचरण करता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๘.
क्रोध से अभिभूत व्यक्ति धन की हानि को प्राप्त होता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๘.
क्रोध से उन्मत्त व्यक्ति यश और पद खो बैठता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๘.
बन्धु, मित्र और सखा क्रोधी मनुष्य से दूर रहते हैं।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙.
क्रोधी अर्थ को नहीं जानता।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙.
क्रोधी धर्म को नहीं देखता।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙.
क्रोधी जिसे नष्ट करना चाहे, उसके लिए कठिन भी सरल के समान हो जाता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙.
बाद में क्रोध शान्त होने पर वह आग में जलने के समान सन्तप्त होता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙.
क्रोध से अभिभूत व्यक्ति को तनिक भी सहारा नहीं रहता।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙.
क्रोधी अपनी माता तक को मार सकता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๙๙.
जिसमें क्रोध उत्पन्न हो गया, वह नष्ट हो गया।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๑๐๐.
क्रोध को दम से काट डाले।
นัย- องฺ. สตฺตก. ๒๓/๑๐๐.
क्रोध को प्रज्ञा से काट डाले।
นัย- องฺ. สตฺตก. ๒๓/๑๐๐.
क्रोध के वश में मत पड़ो।
ขุ. ชา. ทุก. ๒๗/๖๙.
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
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