พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นตรี · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๑ · ๕๐๐ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๕๘ บท
ธัมมวรรค — หมวดธรรม ๒๐ บท
धर्म बिना कीचड़ के सरोवर के समान है।
ขุ. ชา. ฉกฺก. ๒๗/๒๐๒.
सब धर्म मन के आगे चलने वाले हैं।
ขุ. ธ. ๒๕/๑๕.
धर्म ही ऋषियों की ध्वजा है।
สํ. นิ. ๑๖/๒๖. องฺ. จตุกฺก. ๒๑/๖๖. ขุ. ชา. อสีติ. ๒๘/๑๕๒.
सत्पुरुषों का धर्म जानना कठिन है।
สํ. ส. ๑๕/๒๖. ขุ. ชา. ทุก. ๒๗๑๖๓. ขุ. ชา. ทสก. ๒๗๑๒๙๔.
सत्पुरुषों का धर्म जीर्ण नहीं होता।
สํ. ส. ๑๕/๑๐๒. ขุ. ธ. ๒๕/๓๕. ขุ. ชา. อสีติ. ๒๘/๑๓๖.
सत्पुरुषों का धर्म सत्पुरुषों द्वारा रक्षित है।
ที. มหา. ๑๐/๒๗๙.
भली-भाँति आचरित धर्म सुख लाता है।
สํ. ส. ๑๕/๕๘. ขุ. สุ. ๒๕/๓๖๐. ขุ. ชา. ทสก. ๒จ/๒๙๐. ขุ. เถร. ๒๖/๓๑๔.
सद्धर्म में स्थित व्यक्ति सबका हितकारी होता है।
องฺ. อฏฺฐก. ๒๓/๒๔๙.
धर्म में प्रीति रखने वाला सुख से रहता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๕.
धर्म का आचरण करने वाला सुख से रहता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๗, ๓๘. ขุ. อุ. ๒๕/๓๖๖.
धर्म ही धर्माचारी की रक्षा करता है।
ขุ. ชา. ทสกฺ ๒๗/๒๙๐. ขุ. เถร. ๒๖/๓๑๔.
धर्माचारी दुर्गति में नहीं जाता।
ขุ. ชา. ทสก. ๒๗/๙๐. ขุ. เถร. ๒๖/๓๑๔.
कीर्ति धर्म में स्थित व्यक्ति को नहीं छोड़ती।
องฺ. ปญฺจก. ๒๓/๕๑.
धर्म में स्थित व्यक्ति पाप नहीं करता।
องฺ. จตุตกฺก. ๒๑/๒๕.
किसी भी धर्म को पकड़ना (आसक्ति करना) नहीं चाहिए।
ม. ม. ๑๒/๔๖๔.
धर्म का योनिसो (बुद्धिपूर्वक) विचय करे।
ม. อุปฺ ๑๔/๔๗๑. สํ. ส. ๑๕/๗๘. องฺ. สตฺตก. ๒๓/๓.
धर्म का सुचरित आचरण करे, दुश्चरित नहीं।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๘. ขุ. อุ. ๒๕/๓๖๖.
सद्धर्म का आदर करना चाहिए।
องฺ. จตุกฺก. ๒๑/๒๗.
पण्डित काले (अकुशल) धर्म को त्याग दे।
สํ. มหา. ๑๙/๒๙. ขุ. ธ. ๒๕/๒๖.
पण्डित शुक्ल (कुशल) धर्म की भावना करे।
สํ. มหา. ๑๙/๒๙. ขุ. ธ. ๒๕/๒๖.
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