พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นตรี · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๑ · ๕๐๐ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๕๘ บท
ปัญญาวรรค — หมวดปัญญา ๒๑ บท
प्रज्ञा के समान प्रकाश कोई नहीं।
สํ. ส. ๑๕/๙.
प्रज्ञा संसार में प्रकाश है।
สํ. ส. ๑๕/๖๑.
प्रज्ञा योग (अभ्यास) से उत्पन्न होती है।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๒.
प्रज्ञा का क्षय अयोग (अभ्यास के अभाव) से होता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๒.
प्रज्ञा की प्राप्ति सुख उत्पन्न करती है।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๙.
प्रज्ञा मनुष्यों का रत्न है।
สํ. ส. ๑๕/๕๐.
प्रज्ञा ही धन से श्रेष्ठ है।
นัย- ม. ม. ๑๓/๔๑๓. นัย- ขุ. เถร. ๒๖/๓๗๙.
प्रज्ञाहीन के लिए ध्यान (चिन्तन) नहीं होता।
ขุ. ธ. ๒๕/๖๕.
जो ध्यान (चिन्तन) नहीं करता, उसे प्रज्ञा नहीं होती।
ขุ. ธ. ๒๕/๖๕.
प्रज्ञा उस पुरुष का शासन करती है।
สํ. ส. ๒๕/๕๒.
आलसी प्रज्ञा से मार्ग नहीं पाता।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๒.
अप्रमत्त, विचारशील और ध्यान से सुनने वाला प्रज्ञा पाता है।
สํ. ส. ๑๕/๓๑๖. ขุ. สุ. ๒๕/๓๖๑.
मनुष्य प्रज्ञा से अर्थ को देखता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๓.
मनुष्य प्रज्ञा से शुद्ध होता है।
ขุ. สุ. ๒๕/๓๖๑.
चतुर लोग कहते हैं कि प्रज्ञा ही सर्वश्रेष्ठ है।
ขุ. ชา. สตฺตก. ๒๗/๕๔๑.
ज्ञानी प्रज्ञा से जीने वाले के जीवन को श्रेष्ठ कहते हैं।
สํ. ส. ๑๕/๕๘, ๓๑๕. ขุ. สุ. ๒๕/๓๖๐.
भाषित के अर्थ को जानने वाला एक ही प्रज्ञावान श्रेष्ठ है।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๓๒.
प्रज्ञावान गृहस्थ बहुतों के हित के लिए होता है।
องฺ. อฏฺฐก. ๒๓/๒๔๙.
प्रज्ञा संवाद से जानी जाती है।
นัย. ขุ. อุ. ๒๕/๑๗๘.
जिस प्रकार से प्रज्ञा बढ़े, उसी प्रकार अपने को स्थापित करे।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๒.
प्रज्ञा की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
ม. อุป. ๑๔/๔๓๖.
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
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