พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นตรี · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๑ · ๕๐๐ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๕๘ บท
ปัญญาวรรค — หมวดปัญญา
ปัญญาวรรค — หมวดปัญญา · นักธรรมชั้นตรี
บาลี (อักษรไทย)
สากจฺฉาย ปญฺญา เวทิตพฺพา.
Pāli (Roman) ถอดอัตโนมัติ
Sākacchāya paññā veditabbā.
คัมภีร์ที่มา : นัย. ขุ. อุ. ๒๕/๑๗๘.
คำแปล : ปัญญาพึงรู้ได้ด้วยการสนทนา.
हिन्दी : प्रज्ञा संवाद से जानी जाती है।
คำแปลทุกภาษา / All languages (9)
ไทยปัญญาพึงรู้ได้ด้วยการสนทนา.
EnglishWisdom is known through conversation.
IndonesiaKebijaksanaan diketahui melalui percakapan.
中文智慧可由谈论而得知。
DeutschWeisheit erkennt man im Gespräch.
DanskVisdom kendes gennem samtale.
हिन्दीप्रज्ञा संवाद से जानी जाती है।
日本語智慧は対話によって知られる。
नेपालीप्रज्ञा संवादबाट थाहा हुन्छ।

คำอธิบาย
คำอธิบายของบทนี้อยู่ระหว่างจัดทำและตรวจทาน
« บทก่อนหน้า บทถัดไป »
สุภาษิตในวรรคเดียวกัน — เลือกใช้เป็นกระทู้เชื่อมได้
นตฺถิ ปญฺญาสมา อาภา.
प्रज्ञा के समान प्रकाश कोई नहीं।
สํ. ส. ๑๕/๙.
ปญฺญา โลกสฺมิ ปชฺโชโต.
प्रज्ञा संसार में प्रकाश है।
สํ. ส. ๑๕/๖๑.
โยคา เว ชายตี ภูริ.
प्रज्ञा योग (अभ्यास) से उत्पन्न होती है।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๒.
อโยคา ภูริสงฺขโย.
प्रज्ञा का क्षय अयोग (अभ्यास के अभाव) से होता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๒.
สุโข ปญฺญาปฏิลาโภ.
प्रज्ञा की प्राप्ति सुख उत्पन्न करती है।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๙.
ปญฺญา นรานํ รตนํ.
प्रज्ञा मनुष्यों का रत्न है।
สํ. ส. ๑๕/๕๐.
ปญฺญาว ธเนน เสยฺโย.
प्रज्ञा ही धन से श्रेष्ठ है।
นัย- ม. ม. ๑๓/๔๑๓. นัย- ขุ. เถร. ๒๖/๓๗๙.
นตฺถิ ฌานํ อปญฺญสฺส.
प्रज्ञाहीन के लिए ध्यान (चिन्तन) नहीं होता।
ขุ. ธ. ๒๕/๖๕.
ปญฺญา นตฺถิ อฌายโต.
जो ध्यान (चिन्तन) नहीं करता, उसे प्रज्ञा नहीं होती।
ขุ. ธ. ๒๕/๖๕.
ปญฺญา เจนํ ปสาสติ.
प्रज्ञा उस पुरुष का शासन करती है।
สํ. ส. ๒๕/๕๒.
ปญฺญาย มคฺคํ อลโส น วินฺทติ.
आलसी प्रज्ञा से मार्ग नहीं पाता।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๒.
สุสฺสูสํ ลภเต ปญฺญํ อปฺปมตฺโต วิจกฺขโณ.
अप्रमत्त, विचारशील और ध्यान से सुनने वाला प्रज्ञा पाता है।
สํ. ส. ๑๕/๓๑๖. ขุ. สุ. ๒๕/๓๖๑.
ปญฺญายตฺถํ วิปสฺสติ.
मनुष्य प्रज्ञा से अर्थ को देखता है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๓.
ปญฺญาย ปริสุชฺฌติ.
मनुष्य प्रज्ञा से शुद्ध होता है।
ขุ. สุ. ๒๕/๓๖๑.
ปญฺญา หิ เสฏฺฐา กุสลา วทนฺติ.
चतुर लोग कहते हैं कि प्रज्ञा ही सर्वश्रेष्ठ है।
ขุ. ชา. สตฺตก. ๒๗/๕๔๑.
ปญฺญาชีวึ ชีวิตมาหุ เสฏฺฐํ.
ज्ञानी प्रज्ञा से जीने वाले के जीवन को श्रेष्ठ कहते हैं।
สํ. ส. ๑๕/๕๘, ๓๑๕. ขุ. สุ. ๒๕/๓๖๐.
เอโกว เสยฺโย ปุริโส สปญฺโญ โย ภาสิตสฺส วิชานาติ อตฺถํ.
भाषित के अर्थ को जानने वाला एक ही प्रज्ञावान श्रेष्ठ है।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๓๒.
พหูนํ วต อตฺถาย สปฺปญฺโญ ฆรมาวสํ.
प्रज्ञावान गृहस्थ बहुतों के हित के लिए होता है।
องฺ. อฏฺฐก. ๒๓/๒๔๙.
ตถตฺตานํ นิเวเสยฺย ยถา ภูริ ปวฑฺฒติ.
जिस प्रकार से प्रज्ञा बढ़े, उसी प्रकार अपने को स्थापित करे।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๒.
ปญฺญํ นปฺปมชฺเชยฺย.
प्रज्ञा की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
ม. อุป. ๑๔/๔๓๖.
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
ฝึกแต่งกระทู้ธรรม แบบฝึกท่องจำ ปัญหาธรรมศึกษาย้อนหลัง หน้าหลัก