พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นตรี · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๑ · ๕๐๐ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๕๘ บท
สติวรรค — หมวดสติ
สติวรรค — หมวดสติ · นักธรรมชั้นตรี
บาลี (อักษรไทย)
สติมา สุขเมธติ.
Pāli (Roman) ถอดอัตโนมัติ
Satimā sukhamedhati.
คัมภีร์ที่มา : สํ. ส. ๑๕/๓๐๖.
คำแปล : คนมีสติ ย่อมได้รับความสุข.
हिन्दी : स्मृतिमान व्यक्ति सुख पाता है।
คำแปลทุกภาษา / All languages (9)
ไทยคนมีสติ ย่อมได้รับความสุข.
EnglishThe mindful person obtains happiness.
IndonesiaOrang yang penuh perhatian memperoleh kebahagiaan.
中文有正念者获得快乐。
DeutschDer Achtsame erlangt Glück.
DanskDen opmærksomme opnår lykke.
हिन्दीस्मृतिमान व्यक्ति सुख पाता है।
日本語念ある人は楽を得る。
नेपालीस्मृतिमान् व्यक्तिले सुख पाउँछ।

คำอธิบาย
यह व्याख्या बौद्ध सूक्ति की व्याख्या का केवल एक उदाहरण है, कोई उत्तर-कुंजी नहीं। विद्यार्थियों को इसे केवल प्रारंभिक मार्गदर्शन के रूप में उपयोग करना चाहिए। विस्तृत समझ के लिए त्रिपिटक और अन्य ग्रंथों का भी अध्ययन करें।
คำอธิบายนี้เป็นเพียงตัวอย่างการตีความพุทธศาสนสุภาษิต ไม่ใช่เฉลย ผู้ศึกษาควรใช้เป็นแนวทางเบื้องต้นเท่านั้น หากต้องการความพิสดาร ควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ ประกอบด้วย

सूक्ति "सतिमा सुखमेधति" का अर्थ है "स्मृतिमान व्यक्ति सुख प्राप्त करता है।" यह सूक्ति सिखाती है कि स्मृतिमान व्यक्ति सुख प्राप्त करता है। पालि भाषा में "सुख प्राप्त करता है" का अर्थ है कि सुख बढ़ता और फलता-फूलता है, अर्थात् वह केवल क्षण भर के लिए सुखी नहीं होता, बल्कि वह सुख निरंतर बढ़ता जाता है। स्मृतिमान व्यक्ति सुखी होता है, क्योंकि स्मृति प्रमाद से उत्पन्न होने वाले दुःख को रोकती है और उचित सुख के लिए जीवन में प्रवेश का मार्ग खोलती है।

मनुष्य के बहुत-से दुःख स्मृति के अभाव से उत्पन्न होते हैं, जैसे बिना सोचे बोलकर दूसरों से झगड़ा कर लेना, बिना रुके-सोचे खर्च करके कर्ज़ में डूब जाना, असावधानी से काम करके हानि कर बैठना, या मन को उन्हीं बातों में घूमते रहने देना जो उसे मलिन करती हैं। स्मृतिमान व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को पहचानता है: जब क्रोध उत्पन्न होता है, तो वह जानता है; जब चिंता उत्पन्न होती है, तो वह जानता है; और वह उन भावनाओं को स्वयं पर हावी नहीं होने देता। इसलिए उसका मन शांत रहता है, और वह शांति ही सच्चा सुख है। इसके अतिरिक्त, स्मृतिमान व्यक्ति वर्तमान में रहना जानता है और सामने की वस्तुओं से पूर्ण सुख प्राप्त करता है; वह न अतीत में डूबा रहता है और न भविष्य की अत्यधिक चिंता करता है।

वास्तविक जीवन में, स्मृतिमान व्यक्ति भोजन करते समय मात्रा जानता है और इतना नहीं खाता कि बीमार पड़ जाए, इसलिए उसका स्वास्थ्य अच्छा रहता है। स्मृतिमान व्यक्ति आलोचना सुनने पर निष्पक्ष मन से विचार करता है कि किस बात में सुधार करना चाहिए, और उसे मन में रखकर इतना दुःखी नहीं होता कि नींद न आए। जो विद्यार्थी समय के उपयोग में स्मृतिमान है और पढ़ने तथा खेलने का समय बाँटना जानता है, वह अच्छी तरह पढ़ता है और विद्यार्थी-जीवन का सुख पाता है।

इसलिए जो सुख चाहता है, उसे उसे दूर खोजने की आवश्यकता नहीं है; केवल सदा सजग रहने के लिए स्मृति का अभ्यास करे, तो सुख अपने आप मन में उत्पन्न होगा और बढ़ेगा, जैसा कि सूक्ति कहती है: "स्मृतिमान व्यक्ति सुख प्राप्त करता है।"

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สุภาษิตในวรรคเดียวกัน — เลือกใช้เป็นกระทู้เชื่อมได้
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स्मृति ही संसार में जागृति का धर्म है।
สํ. ส. ๑๕/๖๑.
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ว. ว.
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สํ. ส. ๑๕/๓๐๖.
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ส. ส.
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
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