पण्डित कहलाने वाला सचमुच प्रयोजन सिद्ध करता है।
อ. ส. ๑๕/๓๐๙. ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๓๒.
शीलसम्पन्न पण्डित प्रज्वलित अग्नि के समान चमकता है।
ที. ปาฏิ. ๑๑/๒๐๒.
पण्डित अनर्थ को छोड़कर केवल अर्थ (हित) को ग्रहण करता है।
องฺ. จตุกฺก. ๒๑/๕๙.
पण्डित इन्द्रियों की रक्षा करता है।
ที. มหา. ๑๐/๒๘๘. สํ. ส. ๑๕/๓๗.
पण्डित उतार-चढ़ाव (उल्लास-विषाद) नहीं दिखाता।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๖.
पण्डित का बल दूसरों के दोष न देखना है।
องฺ. อฏฺฐก. ๒๓/๒๒๗.
आजानीय (श्रेष्ठ) पुरुष दुर्लभ है।
ขุ. ธ. ๒๕/๔๑.
अंग-गुणों से सम्पन्न व्यक्ति दुर्लभ है।
ขุ. ชา. ทุก. ๒๗/๘๕.
मनुष्यों में जिसने अपने को वश में किया है, वही श्रेष्ठ है।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๗. ขุ. มหา. ๒๙/๒๙๑. ขุ. จู. ๓๐/๗๔.
नाथ (शरणदाता) महाकारुणिक हैं।
ส. ม.
चतुर व्यक्ति पाप को त्याग देता है।
ที. มหา. ๑๐/๑๕๙. ขุ. อุ. ๒๕/๒๑๕.
प्रज्ञावान बताने योग्य मार्ग बताता है।
ขุ. ชา. เตรส. ๒๗/๓๕๕.
प्रज्ञावान अपने काम से बाहर की बात में नहीं लगता।
ขุ. ชา. เตรส. ๒๗/๓๕๕.
ज्ञानी धन पाकर ज्ञातियों का संग्रह (सहायता) करता है।
ขุ. ชา. ฉกฺก. ๒๗/๒๐๕.
समूह का संचालन करने की शक्ति वाला ज्ञानी प्रयोजन सिद्ध करता है।
ขุ. ชา. สตฺตก. ๒๗/๒๒๑.
सत्पुरुष काम की इच्छा से बात नहीं करते।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๖.
जो धर्म के अनुसार नहीं बोलता, वह सत्पुरुष नहीं।
สํ. ส. ๑๕/๒๗๐.
सत्पुरुष प्राणियों के उपकार में आनन्दित होते हैं।
ชาตกฏฺฐกถา ๑/๒๓๐.
सत्पुरुष हिमालय पर्वत की तरह दूर से ही प्रकट होते हैं।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๕.
सत्पुरुष स्वर्ग को जाने वाले होते हैं।
สํ. ส. ๑๕/๒๗. ขุ. ชา. ทุก. ๒๗/๖๔.
सत्पुरुष सब दिशाओं में फैल जाते हैं।
องฺ. ติก. ๒๐/๒๙๑. ขุ. ธ. ๒๕/๒๒.
शान्त व्यक्ति सुख से रहता है।
วิ. จุล. ๗/๑๐๖. สํ. ส. ๑๕/๓๑๒. องฺ. ติก. ๒๐/๑๗๕.
सत्पुरुषों की सुगन्ध हवा के विपरीत भी फैलती है।
องฺ. ติก. ๒๐/๒๙๑. ขุ. ธ. ๒๕/๒๒.
सज्जन अनासक्ति से मुक्त होते हैं।
ม. อุป. ๑๔/๓๔๖. องฺ. ติก. ๒๐/๑๘๐.
जो मूर्ख अपनी मूर्खता को जानता है, वह उतने से पण्डित है।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๓.
समूह का संचालन करने की शक्ति वाला मूर्ख प्रयोजन सिद्ध नहीं करता।
ขุ. ชา. สตฺตก. ๒๗/๒๒๑.
मूर्ख को नेता नहीं होना चाहिए।
ขุ. ชา. ทุก. ๒๗/๘๙.
मूर्ख का बल दूसरों के दोष देखना है।
องฺ. อฏฺฐก. ๒๓/๒๒๗.
असत्पुरुष यहीं बैठे हुए भी दिखाई नहीं देते, जैसे रात में छोड़े गए बाण।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๕.
असत्पुरुष नरक में जाते हैं।
สํ. ส. ๑๕/๒๗. ขุ. ชา. ทุก. ๒๗/๖๔.
मन्दबुद्धि न बताने योग्य मार्ग बताता है।
ขุ. ชา. เตรส. ๒๗/๓๕๕.
मन्दबुद्धि अपने काम से बाहर की बात में लगता है।
ขุ. ชา. เตรส. ๒๗/๓๕๕.
मन्दबुद्धि लाभ को गँवा देता है।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๑๕.
मन्दबुद्धि द्रोह करता है।
ขุ. ชา. ทสก. ๒๗/๒๙๑.
चोर संसार के लिए अशुभ (कलंक) हैं।
สํ. ส. ๑๕/๖๐.
अच्छे को जानने वाला उन्नति करता है।
ขุ. สุ. ๒๕/๓๔๖.
बुरे को जानने वाला अवनति करता है।
ขุ. สุ. ๒๕/๓๔๖.
धर्म को प्रिय मानने वाला उन्नति करता है।
ขุ. สุ. ๒๕/๓๔๖.
धर्म से द्वेष करने वाला अवनति करता है।
ขุ. สุ. ๒๕/๓๔๖.
सत्कार करने वाला सत्कार पाता है।
ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๑๕๔.
आदर करने वाले का आदर होता है।
ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๑๕๔.
पूजा करने वाला पूजा पाता है।
ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๑๕๔.
वन्दना करने वाले को प्रतिवन्दना मिलती है।
ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๑๕๔.
बहुश्रुत को विचार को ही प्रधान मानना चाहिए।
องฺ. อฏฺฐก. ๒๓/๒๒๗.
बहुत से ज्ञाति होना लाभ सिद्ध करता है।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๒๓.
घनिष्ठता परम ज्ञाति (नाता) है।
ขุ. ธ. ๒๕/๔๒.
अकेले खाने वाले को सुख नहीं मिलता।
ขุ. ชา. ทฺวาทส. ๒๗/๓๓๓.
संसार में ऐसा कोई नहीं जिसकी निन्दा न हो।
ขุ. ธ. ๒๕/๔๕.
दुर्बल का तिरस्कार किया जाता है।
ขุ. ชา. ทฺวาทส. ๒๗/๓๓๙.
कठोर के वैरी होते हैं।
ขุ. ชา. ทฺวาทส. ๒๒/๓๓๙.
प्रेम में पड़ा व्यक्ति बहुत बोलता है।
ขุ. ชา. ทฺวาทส. ๒๗/๓๓๙.
क्रोधित व्यक्ति बहुत बोलता है।
ขุ. ชา. ทฺวาทส. ๒๗/๓๓๙.
उपाय के बिना लाभ चाहने वाला कष्ट पाता है।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๑๖.
सरल (ईमानदार) व्यक्ति सत्य से हटकर नहीं बोलता।
ขุ. ชา. จตุกฺก. ๒๗/๑๒๘.
जैसा कहे, वैसा करे।
ที. มหา. ๑๐/๒๕๕. ขุ. สุ. ๒๕/๓๙๔. ขุ. เถร. ๒๖/๔๔๑. ขุ. ชา. จตุตฺก. ๒๗/๑๔๖.
संसार में कुछ लोग लज्जा से रुके रहते हैं।
สํ. ส. ๑๕/๑๑. ขุ. ธ. ๒๕/๓๔.
कवि गाथाओं के आश्रय हैं।
สํ. ส. ๑๕/๕๒.
माता-पिता (सन्तान के लिए) ब्रह्मा कहे गए हैं।
องฺ. ติก. ๒๐/๑๖๘. องฺ. จตุกฺก. ๒๑/๙๒. ขุ. อิติ. ๒๕/๓๑๔.
माता-पिता (सन्तान के लिए) पूर्वाचार्य कहे गए हैं।
องฺ. ติก. ๒๐/๑๖๘. องฺ. จตุกฺก. ๒๑/๙๒. ขุ. อิติ. ๒๕/๓๑๔.
माता-पिता सन्तान के आदरणीय हैं।
องฺ. ติก. ๒๐/๑๖๘. องฺ. จตุกฺก. ๒๑/๙๒. ขุ. อิติ. ๒๕/๓๑๔.
स्त्रियाँ ब्रह्मचर्य का मल हैं।
สํ. ส. ๑๕/๕๒, ๕๙.
स्त्रियाँ सब वस्तुओं में श्रेष्ठ हैं।
สํ. ส. ๑๕/๖๐.
चतुर पत्नी पति और सब आदरणीय जनों का आदर करती है।
องฺ. อฏฺฐก. ๒๓/๒๗๓.
पति स्त्री का लक्षण (प्रतिष्ठा) है।
สํ. ส. ๑๕/๕๗.
पत्नियों में आज्ञाकारिणी पत्नी श्रेष्ठ है।
สํ. ส. ๑๕/๑๐.
पुत्रों में आज्ञाकारी पुत्र श्रेष्ठ है।
สํ. ส. ๑๕/๑๐.
सन्तान मनुष्यों का आधार है।
สํ. ส. ๑๕/๕๑.
केवल उन्नति का काम करे; दूसरों को पीड़ा न दे।
ขุ. ชา. สตฺตก. ๒๗/๒๑๒.
जिसमें अच्छाई है, वह अपनी अच्छाई की रक्षा करे।
ส. ส.
अभी न आए हुए भय से बचाव करना चाहिए।
ขุ. ชา. จตุกฺก. ๒๗/๑๓๖.