พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นโท · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๒ · ๒๐๑ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๒๙ บท
กิเลสวรรค — หมวดกิเลส ๙ บท
काम विषैले साँप की तरह दाहक हैं; मूर्ख उनमें डूबे रहते हैं और दीर्घकाल तक नरक में दुःख में ठसाठस भरे रहते हैं।
ขุ. เถรี. ๒๖/๔๙๙.
मायावी, अभिमानी, वाचाल, डींग मारने वाले, दंभी और अस्थिर लोग सम्यक्सम्बुद्ध द्वारा उपदिष्ट धर्म में नहीं बढ़ते।
องฺ. จตุกฺก. ๒๑/๓๔.
ब्राह्मण! आर्यजन उस क्रोध को मारने वाले की प्रशंसा करते हैं जिसकी जड़ विष और नोक मधुर है; क्योंकि उस क्रोध को काट देने वाला शोक नहीं करता।
สํ. ส. ๑๕/๒๓๖.
उद्यमी बहुत न सोए; जागरण का सेवन करे और आलस्य, माया, हँसी-मज़ाक, खेल, मैथुन और आभूषण को त्याग दे।
ขุ. สุ. ๒๕/๕๑๕. ขุ. มหา. ๒๙/๔๕๗,๔๖๐.
जो केवल दूसरों के दोष देखता और सदा दोष खोजता रहता है, उसके आस्रव बढ़ते हैं; वह आस्रव-क्षय से दूर है।
ขุ. ธ. ๒๕/๔๙.
जब ब्राह्मण दो धर्मों में पारंगत हो जाता है, तब उस ज्ञानी ब्राह्मण के सब बन्धन समाप्त हो जाते हैं।
ขุ. ธ. ๒๕/๖๗.
इस लोक और परलोक की सब दुर्गतियाँ अविद्या को जड़ और इच्छा-लोभ को तना बनाकर खड़ी हैं।
ขุ. อิติ. ๒๕/๒๕๖.
जिस बाण से बिंधा हुआ मनुष्य सब दिशाओं में दौड़ता है, उस बाण को निकाल लेने पर वह न दौड़ता है, न डूबता है।
ขุ. สุ. ๒๕/๕๑๘. ขุ. มหา. ๑๙/๕๐๑.
अपने ही से उत्पन्न लोभ, द्वेष और मोह दुष्टचित्त व्यक्ति को वैसे ही नष्ट करते हैं, जैसे बाँस का फूल बाँस को मार डालता है।
ขุ. อิติ. ๒๕/๒๖๔. ขุ. มหา. ๒๙/๑๘.
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
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