พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นโท · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๒ · ๒๐๑ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๒๙ บท
จิตตวรรค — หมวดจิต ๑๓ บท
जिसका चित्त अस्थिर है, जो सद्धर्म को नहीं जानता, जिसकी श्रद्धा डाँवाडोल है, उसकी प्रज्ञा परिपूर्ण नहीं होती।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๐.
भली-भाँति परिपूर्ण भावित हितकारी चित्त अप्रमाण होता है; जो सीमित कर्म किया गया, वह कर्म उस चित्त में शेष नहीं रहता।
ขุ. ชา. ทุก. ๒๗/๕๙.
जिसने आना-अपान स्मृति को परिपूर्ण भावित नहीं किया, उसका शरीर और चित्त दोनों काँपते हैं।
ขุ. ปฏิ. ๓๑/๒๕๐.
जिसने आना-अपान स्मृति को भली-भाँति परिपूर्ण भावित किया, उसका शरीर और चित्त दोनों नहीं काँपते।
ขุ. ปฏิ. ๓๑/๒๕๐.
चोर चोर को, शत्रु शत्रु को हानि पहुँचा सकते हैं; पर गलत दिशा में लगा चित्त उससे भी अधिक हानि करता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๐.
जो दूर जाने वाले, अकेले विचरने वाले, अरूप, गुहा (शरीर) में वास करने वाले चित्त का संयम करेगा, वह मार के बन्धन से मुक्त हो जाएगा।
ขุ. ธ. ๒๕/๑๙,๒๐.
माता-पिता या अन्य बन्धु वह नहीं कर सकते; पर सुस्थापित चित्त उससे भी अधिक भला करता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๐.
प्रज्ञावान चंचल, डाँवाडोल, दुरक्ष्य और दुर्निवार्य चित्त को सीधा करता है, जैसे बाण बनाने वाला बाण को सीधा करता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๑๙.
जैसे बुरी तरह छाए हुए घर में वर्षा टपकती है, वैसे ही अभावित चित्त में राग टपकता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๑๖.
जो जंगल के हिरन की तरह शब्द से चौंक उठता है, उसे ‘हल्के चित्त वाला’ कहते हैं; उसका व्रत सफल नहीं होता।
สํ. ส. ๑๕/๒๙๖.
मार के क्षेत्र को छोड़ने के लिए कामगुण रूपी आलय से निकाला गया यह चित्त पानी से निकालकर सूखी ज़मीन पर फेंकी गई मछली की तरह तड़पता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๑๙.
तुम्हारा चित्त गलत समझ के कारण संतप्त है; राग से जुड़े सुन्दर निमित्त से बचो।
สํ. ส. ๑๕/๒๗๗.
जैसे ठोस चट्टान का पहाड़ हवा से नहीं हिलता, वैसे ही पण्डित निन्दा और प्रशंसा से विचलित नहीं होते।
ขุ. ธ. ๒๕/๒๕.
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
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