พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นโท · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๒ · ๒๐๑ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๒๙ บท
ธัมมวรรค — หมวดธรรม ๑๓ บท
जो गलत आचरण करने वाले को धर्म सिखाता है, यदि वह उसके वचन पर चले, तो दुर्गति में नहीं जाता।
ขุ. ชา สฏฺฐี. ๒๘/๓๙.
मन्दबुद्धि और कठोर चित्त वाला जिन का उपदेश सुनकर भी सद्धर्म से उतना ही दूर रहता है, जितनी धरती आकाश से।
ขุ. เถร. ๒๖/๓๒๓.
क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य, शूद्र, चाण्डाल और नीच कर्म करने वाले इस लोक में धर्म का आचरण करके त्रयस्त्रिंश स्वर्ग में समान हो जाते हैं।
ขุ. ชา. ๒๗/๗๖/๑๗๕
तृष्णा को साथी बनाने वाला दीर्घकाल तक भटकता रहता है और इस चंचल संसार को लाँघ नहीं पाता।
ขุ. จู. ๓๐/๓๒๐.
कहते हैं आकाश और पृथ्वी दूर हैं, समुद्र का किनारा भी दूर है; पर सत्पुरुष और असत्पुरुष का धर्म उससे भी कहीं अधिक दूर है।
ขุ. ชา. อสีติ. ๒๘/๑๔๓.
जो अछली, अवाचाल, प्रज्ञावान, अनभिमानी और स्थिरचित्त है, वही सम्यक्सम्बुद्ध द्वारा उपदिष्ट धर्म में शोभित होता है।
องฺ. จตุกฺก. ๒๑/๓๔. ขุ. มหา. ๒๙/๑๕๑.
राग से रँगे, अन्धकार-राशि (अविद्या) से ढके लोग धारा के विरुद्ध जाने वाले उस सूक्ष्म, गम्भीर, दुर्दर्श धर्म को नहीं देखते।
ที. มหา. ๑๐/๔๑.
जब प्रकाश करने वाले बुद्ध लोक में उत्पन्न होते हैं, तब वे दुःख के उपशम की ओर ले जाने वाले इस धर्म को प्रकाशित करते हैं।
ขุ. ปฏิ. ๓๑/๔๑๘.
जिसे सब्रह्मचारियों के प्रति आदर नहीं, वह सद्धर्म से उतना ही दूर है, जितना आकाश धरती से।
ขุ. เถร ๒๖/๓๑๑.
बुद्ध द्वारा भली-भाँति कहे गए धर्म में जो धर्म का आचरण करते हैं, वे दुस्तर मृत्यु-क्षेत्र को पार कर जाएँगे।
ขุ. ธ ๒๕/๒๖.
जो दिव्य भोग, आयु, यश और सुख चाहता है, वह पापों से विरत होकर तीन प्रकार के सुचरित का आचरण करे।
ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๓๐๖.
जो थोड़ा धर्म सुनकर भी शरीर से धर्म को देखता है और धर्म की उपेक्षा नहीं करता, वही धर्मधर है।
ขุ. ธ. ๒๕/๔๙.
धर्म का योनिसो विचय करे; तब प्रज्ञा से अर्थ स्पष्ट दिखता है, और चित्त की विमुक्ति आग के बुझने की तरह होती है।
องฺ. สตฺตก. ๒๓/๔.
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