พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นโท · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๒ · ๒๐๑ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๒๙ บท
วิริยวรรค — หมวดความเพียร ๖ บท
बुद्धिमान और चतुर व्यक्ति थोड़ी-सी पूँजी से भी अपने को स्थापित कर लेता है, जैसे कोई छोटी-सी आग जला ले।
ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๒.
दिन-रात को छोटे या बड़े लाभ से खाली न जाने दे; क्योंकि जिसके पास से दिन-रात बीत जाते हैं, उसका जीवन उतने लाभ से कम हो जाता है।
ขุ. เถร. ๒๖/๓๓๕.
जो अपने कार्यों में उद्यमी, अप्रमत्त, व्यवस्था करने में समझदार और उचित रूप से जीविका चलाने वाला है, वह कमाए हुए धन की रक्षा करता है।
องฺ. อฏฺฐก. ๒๓/๒๙๘.
जब पराक्रम है, तब पण्डित इस लोक में पाप से वैसे ही बचे, जैसे आँख वाला ऊबड़-खाबड़ मार्ग से बचता है।
ขุ. อุ. ๒๕/๑๔๙.
आलसी और हीनवीर्य मनुष्य सौ वर्ष जिए, उससे दृढ़ वीर्यारम्भ करने वाले का एक दिन जीना श्रेष्ठ है।
ขุ. ธ. ๒๕/๓๐.
जो सर्दी और गर्मी को तिनके से अधिक नहीं समझता और पुरुष का कर्तव्य करता है, वह सुख से च्युत नहीं होता।
ที. ปาฏิ. ๑๑/๑๙๙.
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
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