พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
นักธรรมชั้นเอก · พุทธศาสนสุภาษิต เล่ม ๓ · ๒๑๘ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๓ บท
อัปปมาทวรรค — หมวดไม่ประมาท ๖ บท
भिक्षुओ! तुम अप्रमत्त, स्मृतिमान, सुशील बनो; अपने संकल्प भली-भाँति स्थापित करो और अपने चित्त की रक्षा करो।
ที. มหา ๑๐/๑๔๒.
अप्रमाद में रत रहो, अपने चित्त की रक्षा करो; अपने को दलदल से निकालो, जैसे कीचड़ में फँसा हाथी स्वयं को निकाल लेता है।
ขุ. ธ. ๒๕/๕๘.
अप्रमाद में रत और प्रमाद में भय देखने वाला भिक्षु छोटे-बड़े संयोजनों को जला डालता है, जैसे आग छोटे-बड़े ईंधन को जला देती है।
ขุ. ธ. ๒๕/๑๙.
अप्रमाद में रत और प्रमाद में भय देखने वाला भिक्षु पतन के योग्य नहीं होता; वह सचमुच निर्वाण के समीप है।
ขุ. ธ. ๒๕/๑๙.
इस प्रकार विहार करने वाला, स्मृतिमान, अप्रमत्त, ‘मेरा’ मानने वाली ममता को छोड़कर विचरने वाला ज्ञानी भिक्षु इसी लोक में जन्म, जरा, शोक, विलाप और दुःख को त्याग देता है।
ขุ. สุ. ๒๕/๕๓๕. ขุ. จู. ๓๐/๙๒.
प्रज्ञावान उद्यम, अप्रमाद, संयम और दम के द्वारा ऐसा द्वीप बनाए जिसे बाढ़ न डुबो सके।
ขุ. ธ. ๒๕/๑๘.
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