พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
ธรรมศึกษาชั้นเอก ระดับมัธยมศึกษา · ขอบข่ายหลักสูตร ๙ ช่วงชั้น ๒๕๖๔ · ๒๐ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๓ บท
ปัญญาวรรค — หมวดปัญญา
ปัญญาวรรค — หมวดปัญญา · ธรรมศึกษาชั้นเอก ระดับมัธยมศึกษา
บาลี (อักษรไทย)
โย จ วสฺสสตํ ชีเวทุปฺปญฺโญ อสมาหิโต
เอกาหํ ชีวิตํ เสยฺโยปญฺญวนฺตสฺส ฌายิโน.
Pāli (Roman) ถอดอัตโนมัติ
Yo ca vassasataṃ jīveDuppañño asamāhito
Ekāhaṃ jīvitaṃ seyyoPaññavantassa jhāyino.
คัมภีร์ที่มา : ขุ. ธ. ๒๕/๑๙.
คำแปล : ผู้มีปัญญาฆ่ากิเลส มีชีวิตอยู่แค่วันเดียว ประเสริฐกว่าผู้ไร้ปัญญาใจไม่มั่นคง อยู่นานผ่าน ๑๐๐ ปี
คัมภีร์ตามขอบข่ายหลักสูตร ๒๕๖๔ : ขุททกนิกาย ธรรมบท
हिन्दी : मन्दबुद्धि और अस्थिर चित्त वाला सौ वर्ष जिए, उससे प्रज्ञावान ध्यानी का एक दिन जीना श्रेष्ठ है।
คำแปลทุกภาษา / All languages (9)
ไทยผู้มีปัญญาฆ่ากิเลส มีชีวิตอยู่แค่วันเดียว ประเสริฐกว่าผู้ไร้ปัญญาใจไม่มั่นคง อยู่นานผ่าน ๑๐๐ ปี
EnglishThough one of poor wisdom and unsteady mind should live a hundred years, better is a single day in the life of one who is wise and meditative.
IndonesiaSekalipun orang yang berkebijaksanaan rendah dan berpikiran goyah hidup seratus tahun, lebih baik satu hari saja dalam kehidupan orang yang bijak dan bermeditasi.
中文劣慧而心不坚定者纵活百年,不如有智慧而修禅观者活一日。
DeutschLebte einer von geringer Weisheit und unstetem Geist auch hundert Jahre – besser ist ein einziger Tag im Leben des Weisen, der meditiert.
DanskOm end en mand af ringe visdom og ustadigt sind lever hundrede år – bedre er en enkelt dag i den vises, den mediterendes, liv.
हिन्दीमन्दबुद्धि और अस्थिर चित्त वाला सौ वर्ष जिए, उससे प्रज्ञावान ध्यानी का एक दिन जीना श्रेष्ठ है।
日本語智慧に乏しく心の定まらぬ者が百年生きるより、智慧あり瞑想する者が一日生きるほうが勝れている。
नेपालीमन्दबुद्धि र अस्थिर चित्तको मानिस सय वर्ष बाँच्नुभन्दा प्रज्ञावान् ध्यानीको एक दिन बाँच्नु श्रेष्ठ छ।

คำอธิบาย
यह व्याख्या बौद्ध सूक्ति की व्याख्या का केवल एक उदाहरण है, कोई उत्तर-कुंजी नहीं। विद्यार्थियों को इसे केवल प्रारंभिक मार्गदर्शन के रूप में उपयोग करना चाहिए। विस्तृत समझ के लिए त्रिपिटक और अन्य ग्रंथों का भी अध्ययन करें।
คำอธิบายนี้เป็นเพียงตัวอย่างการตีความพุทธศาสนสุภาษิต ไม่ใช่เฉลย ผู้ศึกษาควรใช้เป็นแนวทางเบื้องต้นเท่านั้น หากต้องการความพิสดาร ควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ ประกอบด้วย

सूक्ति "यो च वस्ससतं जीवे दुप्पञ्ञो असमाहितो, एकाहं जीवितं सेय्यो पञ्ञवन्तस्स झायिनो" का अर्थ है "प्रज्ञा-रहित और असमाहित चित्त वाला व्यक्ति चाहे सौ वर्ष जिए, उससे प्रज्ञावान और ध्यानी का एक दिन का जीवन श्रेष्ठ है"। यह सूक्ति सिखाती है कि जीवन का मूल्य आयु की लंबाई से नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता से, अर्थात् प्रज्ञा और स्थिर मन होने से मापा जाता है।

"असमाहित चित्त" का अर्थ है बिखरा हुआ मन, जो भावनाओं के साथ डोलता है और एकाग्र नहीं होता, जबकि "ध्यानी" का अर्थ है शांत और स्थिर मन से वस्तुओं पर विचार करके उन्हें यथार्थ रूप में देखना। जो प्रज्ञा के बिना और बिखरे मन से सौ वर्ष जीता है, वह शायद पूरा जीवन मोह और दुःख में, जीवन को समझे बिना बिता दे, जबकि जिस प्रज्ञावान ने जीवन का सत्य देख लिया, उसने एक ही दिन में अधिक मूल्यवान वस्तु पा ली।

यह कथन प्रज्ञा और समाधि के मूल्य पर बल देने के लिए एक तुलना है; इसका अर्थ यह नहीं कि लंबा जीवन मूल्यहीन है, न ही यह छोटे जीवन की कामना को प्रोत्साहित करता है। इसके विपरीत, जो इस सूक्ति को समझता है, वह जीवन के प्रत्येक दिन को प्रज्ञा के विकास और मन के प्रशिक्षण का बहुमूल्य अवसर मानता है, और इसलिए उसे व्यर्थ नहीं जाने देता।

दैनिक जीवन में, जो हर दिन बिना सीखे या स्वयं का विकास किए मनोरंजन सामग्री स्क्रॉल करने में बिताता है, वह कई वर्ष बीतने पर भी शायद कुछ अधिक न पाए। पर जो प्रतिदिन थोड़ा ही सही, आत्म-चिंतन, समाधि के अभ्यास और उपयोगी पुस्तकें पढ़ने के लिए समय निकालता है, उसके जीवन की गुणवत्ता हर दिन बढ़ती है। जो विद्यार्थी केवल एक घंटा मन लगाकर पढ़ता और गहराई से सोचता है, वह दिन भर खोए-खोए बैठे रहने से अधिक समझ पा सकता है।

इसलिए हमें जीवित रहने और प्रज्ञा के साथ जीने, दोनों की कामना करनी चाहिए; इस जीवन को भलाई करने के लिए सँभालना चाहिए, मन को शांत करने का अभ्यास करना चाहिए और धम्म की समझ बढ़ानी चाहिए। बीते दिनों पर पछताते हुए आज को अच्छा बनाना न भूलें, क्योंकि जिस दिन हम स्वयं को जानना, ग़लतियाँ छोड़ना और मन को प्रशिक्षित करना शुरू करते हैं, वही दिन मूल्यवान होता है, जैसा कि सूक्ति कहती है: "प्रज्ञा-रहित और असमाहित चित्त वाला व्यक्ति चाहे सौ वर्ष जिए, उससे प्रज्ञावान और ध्यानी का एक दिन का जीवन श्रेष्ठ है"

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ขุททกนิกาย เถรคาถา (ขุ. เถร. ๒๖/๓๕๐.)
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ขุททกนิกาย เถรคาถา (ขุ. เถร. ๒๖/๓๕๐.)
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ขุททกนิกาย ธรรมบท (ขุ. ธ. ๒๕/๕๓.)
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
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