พุทธศาสนสุภาษิต

สำหรับวิชากระทู้ธรรม — บาลี คำแปล คัมภีร์ที่มา และคำอธิบายความหมาย เพื่อใช้ศึกษาและเป็นแบบอย่างในการแต่งกระทู้ธรรม

คำอธิบายเป็นเพียงตัวอย่างการตีความ ไม่ใช่เฉลย — ใช้เป็นแนวทางเบื้องต้น และควรศึกษาเพิ่มเติมจากพระไตรปิฎกและคัมภีร์อื่น ๆ

ธรรมศึกษา (ต่างประเทศ)
ธรรมศึกษาชั้นเอก ระดับอุดมศึกษาและประชาชนทั่วไป · ขอบข่ายหลักสูตร ๙ ช่วงชั้น ๒๕๖๔ · ๒๐ บท · มีคำอธิบายแล้ว ๖ บท
กัมมวรรค — หมวดกรรม ๔ บท
‘बहुत ठंड है, बहुत गर्मी है, बहुत देर हो गई’ कहकर काम छोड़ देने वाले के पास से सारे लाभ निकल जाते हैं।
ทีฆนิกาย ปาฏิกวรรค (ที. ปาฏิ. ๑๑/๑๙๙.)
जैसा बीज बोता है, वैसा ही फल पाता है; अच्छा करने वाला अच्छा पाता है, बुरा करने वाला बुरा।
สังยุตตนิกาย สคาถวรรค (สํ. ส. ๑๕/๓๓๓.)
मन्दबुद्धि मूर्ख पाप करते हुए उसे समझता नहीं; वह अपने ही कर्मों से आग में जलने के समान संतप्त होता है।
ขุททกนิกาย ธรรมบท (ขุ. ธ. ๒๕/๓๓.)
सभी प्राणी सुख चाहते हैं। जो अपने सुख की खोज में उन्हें दण्ड से पीड़ित करता है, वह मरने के बाद सुख नहीं पाता।
ขุททกนิกาย ธรรมบท (ขุ. ธ. ๒๕/๓๒.)
จิตตวรรค — หมวดจิต ๔ บท
जिसने आना-अपान स्मृति को भली-भाँति परिपूर्ण भावित किया, उसका शरीर और चित्त दोनों नहीं काँपते।
ขุททกนิกาย ปฏิสัมภิทามรรค (ขุ. ปฏิ. ๓๑/๒๕๐.)
चोर चोर को, शत्रु शत्रु को हानि पहुँचा सकते हैं; पर गलत दिशा में लगा चित्त उससे भी अधिक हानि करता है।
ขุททกนิกาย ธรรมบท (ขุ. ธ. ๒๕/๒๐.)
जैसे बुरी तरह छाए हुए घर में वर्षा टपकती है, वैसे ही अभावित चित्त में राग टपकता है।
ขุททกนิกาย ธรรมบท (ขุ. ธ. ๒๕/๑๖.)
संसार चित्त द्वारा ले जाया जाता है, चित्त द्वारा खींचा जाता है; सभी प्राणी एकमात्र चित्त के वश में हो जाते हैं।
สังยุตตนิกาย สคาถวรรค (สํ. ส. ๑๕/๕๔.)
มัจจุวรรค — หมวดความตาย ๔ บท
दिन-रात बीतते हैं, जीवन घटता जाता है, प्राणियों की आयु क्षीण होती जाती है, जैसे छोटी-छोटी नदियों का पानी।
สังยุตตนิกาย สคาถวรรค (สํ. ส. ๑๕/๑๕๙. ขุ. มหา. ๒๙/๑๔๔.)
बालक और वृद्ध, मूर्ख और पण्डित — सब मृत्यु के वश में जाते हैं; सबके आगे मृत्यु है।
ขุททกนิกาย สุตตนิบาต (นัย. ที. มหา. ๑๐/๑๔๑. ขุ. สุ. ๒๕/๔๔๘.)
जैसे किनारे तक भरी नदी तट पर उगे पेड़ों को बहा ले जाती है, वैसे ही सब प्राणी जरा और मृत्यु द्वारा बहा दिए जाते हैं।
ขุททกนิกาย ชาดก มหานิบาต (ขุ. ชา. มหา. ๒๘/๑๖๔.)
जैसे ग्वाला डण्डे से गायों को चरागाह की ओर हाँकता है, वैसे ही जरा और मृत्यु प्राणियों की आयु को हाँकती हैं।
ขุททกนิกาย ธรรมบท (ขุ. ธ. ๒๕/๓๓.)
ปัญญาวรรค — หมวดปัญญา ๔ บท
चतुर लोग कहते हैं कि प्रज्ञा सर्वश्रेष्ठ है, जैसे चन्द्रमा तारों में श्रेष्ठ है; शील, श्री और सत्पुरुषों का धर्म भी प्रज्ञावान के पीछे चलते हैं।
ขุททกนิกาย ชาดก จัตตาฬีสนิบาต (ขุ. ชา. จตฺตาฬีส. ๒๗/๕๔๑.)
मन्दबुद्धि मनुष्य यश पाकर अपने अहित का आचरण करता है और अपने तथा दूसरों को पीड़ा देने की राह चलता है।
ขุททกนิกาย ชาดก เอกนิบาต (ขุ. ชา. เอก. ๒๗/๔๐.)
सब तृप्तियों में प्रज्ञा से तृप्ति श्रेष्ठ है; प्रज्ञा से तृप्त व्यक्ति काम से संतप्त नहीं होता; तृष्णा प्रज्ञा से तृप्त व्यक्ति को वश में नहीं कर सकती।
ขุททกนิกาย ชาดก ทวาทสกนิบาต (ขุ. ชา. ทฺวาทส. ๒๗/๓๒๙.)
प्रज्ञा सुने हुए का निर्णय करने का साधन है, प्रज्ञा कीर्ति और यश बढ़ाती है; इस लोक में प्रज्ञा से युक्त व्यक्ति दुःख में भी सुख पा लेता है।
ขุททกนิกาย เถรคาถา (ขุ. เถร. ๒๖/๓๕๐.)
ปุคคลวรรค — หมวดบุคคล ๔ บท
जो अक्रोधी, दान्त, सम जीवन जीने वाला, सम्यक् ज्ञान से विमुक्त, शान्त और स्थिर है — उसमें क्रोध कहाँ से आएगा?
ขุททกนิกาย เถรคาถา (ขุ. เถร. ๒๖/๓๓๔.)
कामों में थोड़ा आनन्द, बहुत दुःख है; यह जानकर पण्डित दिव्य कामों में भी रुचि नहीं रखता।
ขุททกนิกาย ธรรมบท (ขุ. ธ. ๒๕/๔๐.)
विजयी वैर उत्पन्न करता है, पराजित दुःख से सोता है; जय और पराजय दोनों को छोड़कर शान्त हुआ व्यक्ति सुख से सोता है।
ขุททกนิกาย ธรรมบท (ขุ. ธ. ๒๕/๔๒.)
जन्म से कोई नीच नहीं होता, जन्म से कोई श्रेष्ठ नहीं होता; (बल्कि) कर्म से नीच होता है, कर्म से श्रेष्ठ होता है।
ขุททกนิกาย สุตตนิบาต (ขุ. สุ. ๒๕/๓๕๒.)
บาลีอักษรโรมันถอดจากอักษรไทยโดยอัตโนมัติ · คำอธิบายแสดงเฉพาะบทที่ผ่านการตรวจทานแล้ว
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